क्या प्रेगनेंसी में कैंडी खाना बुरा है?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:26

गर्भावस्था में बाहर भोजन करना: किन बातों का रखें ख्याल

कुछ भोजन और पेय गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेह होते हैं। ऐसे में रेस्टोरेंट के मेन्यू में से अपने लिए स्वस्थ एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थ चुनने में मुश्किल हो सकती है।

मछली, समुद्री भोजन, मांस, अंडे और चीज़ वाले व्यंजनों के चयन में विशेषतौर पर सावधानी बरतें। अगर भोजन को सुरक्षित ढंग से नहीं पकाया गया है, यह कच्चा या अधपका है या फिर सही तापमान में नहीं रखा गया है, तो इसमें कीटाणु पैदा हो सकते हैं। ये कीटाणु भोजन विषाक्तता का कारण बन सकते हैं।

जब आप पेय पदार्थों लें, तो ध्यान रखें कि गर्भावस्था में शराब का सेवन सुरक्षित नहीं है। अशुद्ध पानी, कच्चे (अपाश्च्युरीकृत) दूध से बने पेय, ताजा निकाला जूस और कैफीन युक्त पेय आपके लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

हमेशा प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट को चुने जो कि अपने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए जाना जाता हो। बेहतर है कि सड़क किनारे खड़े ठेले वालों से आप खाने-पीने का सामान न लें।
गर्भावस्था में बाहर किन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए?
गर्भावस्था के दौरान क्या खाना-पीना सुरक्षित है यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। और यदि आप कहीं बाहर खाना खाने जा रही हों, तो आपको यह चिंता होना स्वाभाविक ही है कि आपके लिए क्या खाना-पीना सही रहेगा।

कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं है। वहीं कुछ अन्य भोजन, जो सुरक्षित तो हैं, मगर यदि आप उन्हें तैयार करने में बरती गई स्वच्छता को लेकर सुनिश्चित नहीं हों, तो शायद वे नुकसानदेह हो सकते हैं।

यहां ऐसे भोजनों और पेयों की सूची दी गई है, जिनके सेवन में आपको सावधानी बरतने की जरुरत है:

रेहड़ी वालों से चाट या स्ट्रीट फूड
गर्भावस्था में स्ट्रीट फूड खाना अपने आप में नुकसानदेह नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खाना चाहती हैं और कहां से खाना चाहती हैं।

सड़क किनारे खड़े रेहड़ी वालों से चाट-पकोड़ी खाते समय विशेष सावधानी बरतें। हो सकता है इनमें से कुछ स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का पालन न करते हों। ऐसे में आपको भोजन विषाक्तता पैदा करने वाले कीटाणुओं से संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है।

यदि आप चाट, गोलगप्पा, दही भल्ला, पापड़ी चाट और भेलपूरी आदि खाना चाहें तो बेहतर है कि किसी प्रतिष्ठित स्नैक चेन या रेस्टोरेंट से खाएं, जो अपनी गुणवत्ता, स्वच्छता और सेवा के लिए जाने जाते हों।

गर्भावस्था में स्ट्रीट फूड के सेवन के प्रति सुरक्षा के बारे में यहां और अधिक जानें।

कटे हुए फल और कच्ची सब्जियों से बने व्यंजन
बिना धुले, कच्चे या पहले से कटे फल और सब्जियों की वजह से भोजन विषाक्तता, दस्त (डायरिया) या जल जनित बीमारिया जैसे कि टाइफाइड आदि हो सकती हैं। इनमें लिस्टीरिया नामक जीवाणु भी हो सकता है। साथ ही इनमें कीटाणुनाशक या मिट्टी से टोक्सोप्लाज्मोसिस परजीवी भी हो सकता है।

जिन व्यंजनों में सलाद पत्ते, कच्ची पत्ता गोभी का इस्तेमाल हो, उनके सेवन में भी सावधानी बरतें। चटनी, कच्ची प्याज, खीरा, मूली, कटे हुए नींबू, अचार और रायता आदि का सेवन भी देखभाल कर करें।

ताजा फल और सब्जियों की सलाद केवल उन्हीं जगहों से खाएं जहां की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर आप निश्चित हों।

कच्चे या अधपके अंडों से बने व्यंजन
कच्चे या अधपके अंडों में साल्मोनेला बैक्टीरिया हो सकता है, जिससे भोजन विषाक्तता होने का खतरा रहता है। साल्मोनेला विषाक्तता से सीधे गर्भस्थ शिशु को नुकसान नहीं पहुंचता। मगर, इसकी वजह से आपको उल्टी और दस्त हो सकते हैं, जिससे आपको ​निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) हो सकता है।

डेजर्ट, सॉस या मेयोनेज़ आदि में कच्चा अंडा डला हो सकता है। मांस के साथ मिलने वाली सॉस के बारे में पता कर लें। उदाहरण के तौर पर ताजा बन होलेंडेज़ सॉस में कच्चा अंडा होता है।

कुछ ठंडे सूफल्स व मूज और आइसक्रमी में भी कच्चे अंडे का इस्तेमाल होता है। अगर तिरामिसू आपकी पसंदीदा डेजर्ट है, तो खाने से पहले पता कर लें कि इसमें कच्चा अंडा तो नहीं डाला गया है।

बहुत से रेस्टोरेंट में बिना अंडे की डेजर्ट मिलती हैं, वहीं अधिकांश भारतीय मिठाइयां व अन्य मीठा बिना अंडे के ही बनाया जाता है। यदि आप चाहें तो क्रेम ​ब्रुली या कैरेमल कस्टर्ड खा सकती हैं, क्योंकि इनमें अंडे पके हुए होते हैं।

अधपका या क्योर्ड मांस
अधपके मांस में टोक्सोप्लाज्मोसिस पैदा करने वाले परजीवी हो सकते हैं। हालांकि, टोक्सोप्लाज्मोसिस दुर्लभ संक्रमण है, मगर यह आपके गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।

हमेशा तंदूरी, बार्बेक्यू किए हुए आइटम या फिर अच्छी तरह पके हुए स्टीक ही लें। आप जो भी पका हुआ मांस खाएं उसमें से साफ रस टपकना चाहिए। क्योर्ड मांस जैसे कि सलामी और पार्मा हैम में भी टोक्सोप्लाज्मोसिस पैदा करने वाले परजवी हो सकते हैं।

अधपका समुद्री भोजन या कच्ची मछली
कच्छी मछली या अधपके समुद्री भोजन से भोजन विषाक्तता होने का खतरा रहता है।

यदि आप बाहर खाना खाने जाएं तो हमेशा अच्छी तरह पकाई हुई मछली ही ऑर्डर करें। खासतौर पर जापानी रेस्टोरेंट में इस बात का ख्याल रखें, क्योंकि वे अक्सर मछली को बाहर से केवल हल्का सा पकाकर परोसते हैं।

शार्क, स्वोर्डफिश और मर्लिन जैसी मछलियों के सेवन से बचें। चाहे ये अच्छी तरह पकाई गई हों, तो भी ये आपके गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं, क्योंकि इनमें पारे (मर्करी) का स्तर काफी ज्यादा होता है।

आप सुशी के सेवन में भी सावधानी बरतें। यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि यह किस तरह तैयार की गई है और ताजा है या नहीं, तो बेहतर है इसे न खाएं।

अच्छी तरह पकाए गए समुद्री भोजन जैसे कि ग्रिल्ड ​झींगा या पकी मछली का सेवन आमतौर पर सुरक्षित रहता है। यदि आप चूरा (टुना) मछली खाना चाहें, तो ध्यान रखें कि एक सप्ताह में दो स्टीक से ज्यादा न खाएं।

चीज़
चीज़ कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत है, जो ​कि आपके और आपके शिशु दोनों फायदेमंद है।

मगर मुलायम, फंगस से पकाई गई और ब्लू वेन्ड चीज़ न खाएं क्योंकि इनमें लिस्टीरिया हो सकता है, जिससे होने वाले इनफेक्शन से शिशु को नुकसान पहुंच सकता है।

सीधे फार्म से खरीदी गई कुछ चीज़ अपाश्च्युरीकृत दूध से बनाई गई होती हैं, इसलिए इनमें लिस्टीरिया हो सकता है।

सख्त चीज़ आमतौर पर सुरक्षित होती हैं। फिर भी ए​हतियात के तौर पर वेटर या शैफ से पता कर लें कि चीज़ को केवल पिघलाया न गया हो, बल्कि सभी तरफ से अत्याधिक गर्म होने तक पकाया गया हो।

वे भोजन जिनमें एडिटिव्स और फ्लेवर एनहेंसर हों
एमएसजी ऐसा एडिटिव है जो खाने में स्वाद बढ़ाता है और अक्सर चाइनीज़ खाने और कुछ फास्ट फूड में इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, इस एडिटिव के कोई प्रमाणित नुकसान नहीं है, मगर कुछ लोगों का मााना है कि जब वे एमएसजी युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं तो उन्हें सिरदर्द (माइग्रेन भी), मिचली, उल्टी या चक्कर महसूस होते हैं।

यदि गर्भावस्था से पहले भी एमएसजी के सेवन से आपको साइड इफेक्ट होते थे, तो आप शायद गर्भावस्था में भी इसका सेवन न करना चाहेंगी।

फास्ट फूड
फास्ट फूड सुविधाजनक तो होते हैं, मगर अक्सर इनमें अत्याधिक वसा और पोषक तत्वों की कमी होती है।

कभी-कभार पकोड़े, आलू-चाट, बर्गर या पिज्जा खाया जा सकता है, मगर फास्ट फूड में वसा और नमक बहुत ज्यादा होते हैं, इसलिए इन्हें अपने नियमित आहार का हिस्सा न बनाएं। मसालेदार और तले हुए भोजन एसिडिटी भी पैदा करते हैं।

आप कुछ फास्ट फूड को पौष्टिक बना सकती हैं। उदाहरण के तौर पर यदि आप पिज्जा खा रही हैं तो वसायुक्त मांस की टॉपिंग की बजाय इसमें सब्जियां डालें और पतला बेस चुनें। भोजन से पहले सूप लें, ताकि आपको विस्तृत पोषण मिल सके। आप तले हुए खाद्य पदार्थों की बजाय ग्रिल्ड विकल्प चुन सकते हैं।
पेय पदार्थ ऑर्डर करते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
कुछ पेयों का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं होता, वहीं कुछ के सेवन में आपको सावधानी बरतनी होगी।

शराब (एल्कोहॉल)
विशेषज्ञ इस बात को लेकर निश्चित नहीं है कि गर्भावस्था में कितनी मात्रा में शराब का सेवन सुरक्षित है। इसलिए उनकी सलाह यही है कि प्रेगनेंसी के दौरान शराब न पीएं।

खासतौर पर पहली तिमाही में यह जरुरी है कि शराब का सेवन बिल्कुल भी न किया जाए, क्योंकि इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है। इस दौरान शराब पीने से समय से पहले प्रसव का खतरा भी रहता है।

अधिकांश बार, पब और रेस्टोरेंट में नॉन-एल्कोहॉलिक कॉकटेल या मॉकटेल उपलब्ध होती है। इसलिए आप इनमें से कोई विकल्प चुन सकती हैं या फिर अपने पसंदीदा पेय को बिना शराब के तैयार करवा सकती हैं।

पानी, जूस और सॉफ्ट ड्रिंक्स
जल जनित बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए आपको सावधानी बरतनी होगी कि जो भी पेय आप चुने वे स्वच्छ व सुरक्षित ढंग से तैयार किए जाएं व परोसे जाएं।

यदि आप बाहर खाना खा रही हों तो हमेशा सीलबंद बोतल का पानी लें या प्रतिष्ठित ब्रांड की सॉफ्ट ड्रिंक लें। वेटर को बोतल आपके सामने खोलने के लिए कहें।

यदि आप ठंडा पेय चाहती हैं तो इसमें बर्फ डलवाने की बजाय एकदम ठंडी बोतल लें। सेवनबर्फ बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए पानी के बारे में पूछें। अगर बर्फ किसी स्थानीय रेहड़ी वाले से मंगाई गई हो, जिसके पास इसे जमाने की स्वच्छ सुविधा नहीं है, तो इसमें संदूषित पदार्थ हो सकते हैं। साथ ही, आप इस बारे में सुनिश्चित नहीं हो सकतीं कि ये फिल्टर किए पानी से जमाई गई है।

सड़क किनारे खड़े रेहड़ी वालों या जूस की स्टॉल से ताजा निकाले गए जूस या अन्य पेय जैसे लस्सी, आम पन्ना जलजीरा या नींबू पानी आदि न खरीदें। इन्हें केवल उच्च गुणवत्ता वाले भोजनालय या रेस्टोरेंट से ही पीएं।

कैफीनयुक्त पेय
यदि आपका कॉफी या चाय पीने का मन करे तो पहले ध्यान दें कि आप दिन में कितनी कैफीन पी चुकी हैं। एक दिन में 200 मि.ग्रा. कैफीन से ज्यादा का सेवन न करें, यह मात्रा दो कप चाय या इंस्टेंट कॉफी के बराबर है।

कैफीन ग्रीन टी, कोला, एनर्जी ड्रिंक्स और चॉकलेट में भी होती है। यदि आपको लगता है कि आप पहले से 200 मि.ग्रा. कैफीन ले चुकी हैं, तो ​आप डीकैफिनेटेड कॉफी या पिपरमिंट चाय आदि ऑर्डर कर सकती हैं। ये पाचन के लिए भी सही रहती हैं।
गर्भावस्था में घर से बाहर जा रहे हों, तो कौन से भोजनों का सेवन सही रहता है?
जब आप सफर कर रही हों, तो अक्सर गैर सेहतमंद खाना-पीना हो ही जाता है। चाहे आप दफ्तर जा रही हों, एक दिन के लिए कहीं बाहर गई हों या फिर छुट्टियां मनाने निकली हों, खाने-पीने को लेकर पहले से तैयारी करना फायदेमंद रहता है।

घर से बाहर निकलने से पहले भोजन करके जाएं। सफर के दौरान अपनी ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए कुछ सेहतमंद स्नैक्स अपने पास रखें। ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें जिन्हें सफर में ले जाना आसान होता है और जब भी आप इन्हें खाएं, इनका स्वाद बना ही रहता है, जैसे कि ताजा फल और मेवे व गिरी आदि। यह भी जरुरी है कि आप कोई भी भोजन न चूकें। यदि आप सुनिश्चित नहीं हो कि घर से बाहर जाने पर क्या भोजन उपलब्ध होगा, तो बेहतर है कि खुद के लिए खाना पैक करके ले जाएं।

यह भी सुनिश्चित करें कि आपके पास पीने के लिए पर्याप्त पेय हों, ताकि आप निर्जलीकृत (डिहाइड्रेटेड) न हों। पानी या जूस व नारियल पानी के छोटे टेट्रा पैक अपने साथ रखें।
प्रेगनेंसी में बाहर खाने-पीने को लेकर और क्या एहतियात बरतने चाहिए?
यदि आप खाना खाने कहीं बाहर जाना चाहें या फिर ऑर्डर करके घर पर खाना मंगवाएं तो निम्न बातों को ध्यान में रखें:

ऐसी जगह को चुनें जहां भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जाता हो। स्वच्छता के स्तर पर ध्यान दें। मेज, छुरी-काँटे, क्रॉकरी और परोसने वाले बर्तनों को देखकर आप वहां की सेवाओं के बारे में अंदाजा लगा सकती हैं। ऐसी जगहों पर न जाएं जहां सार्वजनिक स्थानों में सफाई न हो, अगर इन स्थानों में ही स्वच्छता नहीं रखी गई है, तो उन दूसरी जगहों की कल्पना कीजिए, जिनको आप देख नहीं सकते!
सड़क किनारे लगी स्टॉल से खाना न खाएं। साथ ही जहां लगातार ट्रैफिक या आवारा पशुओं की आवाजाही बनी रहे ऐसी सड़क किनारे बने ढाबों या भोजनालयों में भी खाना खाने से बचें। जिन जगहों पर कूड़ादान गंदगी से भरा हो या परिसर में कूड़े की थैलियां इधर-उधर पड़ी हों, वहां भी भोजन न करें। यह गंदगी मक्खियों, मच्छरों और अन्य कीटों को आकर्षित कर सकती हैं।
गर्मागर्म, ताजा पकाया हुआ खाना ही खाए, जो कि आपके ऑर्डर देने के बाद तैयार किया गया हो। पहले से तैयार भोजन न खाएं, क्योंकि पता नहीं वह कितने घंटों से काउंटर पर रखा हो।
साथ ही, बुफे भोजन भी न करें। आप यह सुनिश्चित नहीं कर सकती कि भोजन कितने समय से बाहर रखा है, ​खासतौर पर यदि इसे हल्का गर्म रखा गया है तो। हल्के गर्म खाने में बैक्टीरिया पनपते हैं।
बहुत ज्यादा न खाएं। बेहतर है कि आप एक बार में बहुत ज्यादा खाने की बजाय कम ही खाएं। अपच, सीने में जलन और एसिडिटी गर्भावस्था की आम शिकायते हैं। ऐसे में एक बार में ज्यादा खा लेने से या अनियमित तौर पर खाने से ये शिकायतें और बढ़ सकती हैं।
घर से बाहर जाना हो तो पहले से तैयारी कर लें। यदि बहुत तेज भूख लगी हो और रेस्टोरेंट में भोजन आने मे देर लग रही हो, तो आप अक्सर कम पौष्टिक भोजन चुन लेते हैं और बहुत ज्यादा खा लेते हैं।
यदि मेन्यू में दिए गए किसी व्यंजन के बारे में आप नहीं जानती, तो पता कर लें कि इसमें क्या सामग्रिया हैं और इसे किस तरह पकाया गया है। यदि वेटर को इसके बारे में जानकारी न हो, तो उसे पता करने के लिए कहें। यदि आपको फिर भी कोई संशय हो, तो बेहतर है कि आप इसे न खाएं!

अधिकांश रेस्टोरेंट और भोजनालयों में गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत से विकल्प होते हैं। हालांकि, यदि जरुरत लगे तो अपने लिए विशेष भोजन बनवाने में न हिचकें। अक्सर फूड एलर्जी या आहार संबंधी परहेज के चलते रेस्टोरेंट में ग्राहक अपने लिए विशेष ऑर्डर देते हैं।

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